भारतीय इक्विटी की हाई वैल्यूएशन के चलते FPI ने दूसरे एशियाई बाजारों की ओर रुख किया। कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि मौजूदा बिकवाली के बावजूद स्थितियां धीरे-धीरे भारत के पक्ष में हो सकती हैं। FPI के निवेश में सुधार टैरिफ पर स्पष्टता, करेंसी में स्थिरता, अर्निंग्स की कंडीशन और एक सपोर्टिव ग्लोबल रेट एनवायरमेंट पर निर्भर करेगा
