देश में अब तक स्क्रैपिंग पॉलिसी की प्रगति मामूली रही है। अगस्त 2025 तक, केवल 3 लाख गाड़ियों को ही स्क्रैप किया गया है, जिनमें से 1.41 लाख सरकारी गाड़ियां थीं। औसतन, हर महीने 16,830 गाड़ियों को स्क्रैप किया जा रहा है। प्राइवेट सेक्ट ने इस इकोसिस्टम के निर्माण में 2,700 करोड़ रुपए का निवेश किया है
